Subscribe Via Email (Do Not Edit Here!)

रविवार, 17 अगस्त 2014

दाऊद की गिरफ्तारी न होने का कारण कौन ? पाकिस्तान या भारत के "नेताओं" की इच्छा शक्ति ?

हमारे देश मे दो तरह के नेता पाए जाते हैं आइए आपको एक जीवंत उदाहरण से समझाता हूँ 

सितंबर 2005 मे सरदार पटेल मार्ग पर एक दिन एक गाड़ी को पुलिस ने पकड़ा , पुलिस ने गाड़ी मे पाया की चार लोग थे जिसमे कुख्यात शूटर और दाऊद के लिए काम कर चुका रोहित मल्होत्रा भी था , उसके साथ उसके दो गुर्गे और चौथे आदमी का नाम था अजित कुमार डोवल 

हाँ हाँ ये वही अजित कुमार डोवल हैं जो आज हमारे देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं 

अजित डोवल ने आईबी से रिटायर होने के बाद शूटर रोहित मल्होत्रा को दाऊद की सुपारी दी थी , कुछ लोग ये भी मानते हैं की ऐसा उन्होने कुछ कट्टर राष्ट्रवादी "नेताओं" के सहयोग से किया था(जिनका नाम यहाँ नहीं लिख सकते ) , लेकिन दाऊद के गुर्गे हर पुलिस तंत्र मे घुसे हुए हैं और ये बात सर्वविदित है की सबसे ज्यादा दाऊद के पिल्ले मुंबई पुलिस मे हैं 
 
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल 
जैसे ही ये खबर दाऊद को मिली की अजित डोवल उसकी सुपारी रोहित मल्होत्रा को दे रहा है उसने तुरंत मुंबई पुलिस मे बैठे अपने पिल्लों से दिल्ली पुलिस को सूचना भिजवाई और इन चारों को गिरफ्तार कर लिया गया और जब दिल्ली पुलिस ने उनसे पूछताछ की तब वो भी हक्के बक्के रह गए क्योंकि अंजाने मे दिल्ली पुलिस ने अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार दी थी । 

उस समय अजित कुमार को लेकर पत्रकारों के बीच कई चर्चाएँ हुआ करती थीं लेकिन अजित कुमार को उसी तरह से गायब कर दिया गया जैसे राजीव दीक्षित को किया गया था 

नमन है अजित डोवल जैसे राष्ट्रभक्तों को जो आईबी प्रमुख के पद से रिटायर होने के बाद भी देश सेवा के कार्य मे लगे हुए थे ! 

(प्रस्तुत तथ्य वरिष्ठ पत्रकार और आईबी तथा रक्षा मंत्रालय के जानकार के वी सुरेश के मार्गदर्शन द्वारा लिखी गयी है )

ये तो हुए पहले टाइप के नेता जिन्होने अजित डोवल को सहयोग दिया जिससे दाऊद का खत्मा किया जा सके 

अब दूसरे टाइप के नेता के बारे मे चर्चा करते हैं 

1993 मे मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच को अच्छे से जानकारी थी की दाऊद दुबई मे कहाँ है और किस स्थिति मे है 

लेकिन दाऊद के पिल्ले सिर्फ पुलिस मे ही नहीं हैं कई नेता भी उसकी चरणवंदना कर चुके हैं , 1993 मे मुंबई पुलिस के अधिकारियों ने महाराष्ट्र राज्यसरकार के मुख्यमंत्री शरद पवार से दुबई जाकर दाऊद को पकड़ने की अनुमति मांगी तब पवार ने साफ मना कर दिया इसके बाद भी मुंबई पुलिस के कर्मठ अधिकारियों ने हार नहीं मानी उन्होने केंद्र सरकार से अनुमति मांगी लेकिन तब केंद्र के प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहाराव और गृह मंत्री शंकरराव चव्हाण ने भी अनुमति नहीं दी ! 

ये हैं दूसरे टाइप के नेता जिन्होने दाऊद जैसे विषैले नाग को बढ्ने दिया और इसके कारण सैकड़ों लोग मारे गए 

वैसे आज के समय मे अच्छी सूचना तो ये है की आज दिल्ली मे अजित डोवल जैसे अधिकारी हैं और उस तरह के "नेता" भी सत्ता मे हैं जिन्होने उस समय अजित डोवल की सहायता की थी 


शनिवार, 16 अगस्त 2014

मोदी का 15 अगस्त 2014 का देश के नाम संदेश और कुछ बदलाव जो मैंने देखे

जैसा की मैं अपने पिछले लेख  मे ही भाजपा की स्थिति और महाराष्ट्र मे भाजपा से जुड़ी हुई घटनाओं पर अपने मत बता चुका हूँ लेकिन ऐसे कई पहलू भाजपा से जुड़े होते हैं जो मुझे लिखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं , मैं भाजपा का प्राथमिक सदस्य भी नहीं हूँ लेकिन उसकी कार्यपद्धति का मैं समर्थक हूँ खास कर के भाजपा के "कार्यकर्ता" नरेंद्र मोदी का

15 अगस्त का भाषण सही मायनों मे बहुत ही अलग था , हर वर्ष (विशेषतः पिछले 10 वर्षों मे) जब 15 अगस्त का स्वर्णिम दिवस आता था तब उससे पहले ही पीएमओ मे खटपट मच ही जाती थी
कई बड़े बड़े आईएएस अधिकारियों को भाषण लिखने के काम मे लगा दिया जाता था  ,पुरानी रद्दी मे पड़ी फाइलें खंगाली जाती थीं की पिछले वर्ष मे कितना व्यापार हुआ ,कितना उत्पादन हुआ और फिर हमारे पीएम (जिन्हें कुछ लोग यूपीए अध्यक्षा का रबर स्टैम्प भी कहते हैं ) लाल किले की प्राचीर पर आते थे और उसे बता कर चले जात थे ।

ये सब घटना जितनी आंतरिक रूप से उबाऊ और नीरस होती थी उतना ही इसका बाहरी प्रभाव भी पड़ता था

सुबह कई घरों मे तो लोग 10 बजे सोकर उठते और बाद मे पूरा दिन छुट्टी का मज़ा लेते वैसे इस छुट्टी और सोने के मज़े के बीच देश की जनता हमारे कभी न बोलने वाले भूतपूर्व पीएम साहब का "भाषण" जिसमे वो बोलते हैं वो देखने का सुअवसर गंवा देते थे

15 अगस्त 2013 को तो लोगों की नजर दिल्ली के लाल किले से ज्यादा लालन कॉलेज ,गुजरात पर थी । भारत की जनता तो उन्हें 2009 से ही अगले पीएम के रूप मे देखने लगी थी लेकिन 2013 से तो जनता ने मान ही लिया था , कई "राष्ट्रवादी" बुद्धिजीवियों का तो ये भी मानना है की 2014 के चुनाव बस औपचारिकता भर ही थे बाकी मोदी तो पहले से ही जनता के दिलों मे अपने गुजरात मॉडल ,आतंकवाद विरोधी नीति , कट्टर राष्ट्रवादी छवि के कारण छा चुके थे

तो वापस आते हैं 15 अगस्त 2014 की चर्चा पर,
15 अगस्त 2014 की सुबह लोगों के लिए अलग ही थी क्योंकि उसमे से अधिकतर जनता ने ही तो मोदी को पीएम बनाया था वैसे मोदी का भाषण उन्होने भी देखा जिन्होने मोदी को वोट दिया था और उन्होने तो जरूर देखा जो मोदी के धुर विरोधी हैं

पहली बार पीएम ने ऐसा भाषण दिया जो पूरी तरह से भिन्न था , इसमे बहुत कुछ स्वयं ही करने की प्रेरणा थी , इसमे एक स्वर्णिम भारत और स्वदेशी को प्रचार देने वाले भारत की आधारशिला रखने का प्रण था , इस भाषण मे ऐसे कई छोटे छोटे विचार थे आगे बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं



पीएम के भाषण के बीच टीवी पर कई बार सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर पीएम की कही बातों को नोट करते हुए भी दिखे जो ये बताता है की पीएम का भाषण किसी भी तरह से पूर्वनियोजित नहीं था



पीएम ने सभी विधायकों और सभी सांसदों से आवाहन किया की सभी लोग एक एक गाँव को लेकर एक आदर्श गाँव बनाएँ इसकी पूरी ब्लूप्रिंट भी वो जनता को देने वाले हैं

ऐसी चीजों का उत्पादन करने को कहा जिनका ज़ीरो इफेक्ट पर्यावरण पर पड़े और काम के मामले मे पूरा एफेक्ट करें

ये दो ऐसे मुद्दे थे जो संघ की परिपाठी को ही प्रदर्शित करते हैं , क्योकी अण्णा हज़ारे ने भी अपने गाँव के विकास के लिए संघ के नानासाहेब देशमुख का ही मार्गदर्शन लिया था तो आप समझ सकते हैं की संघ ग्राम विकास को कितनी वरीयता देता है
उसी तरह स्वदेशी निर्माण और रक्षण तथा प्रोत्साहन के लिए संघ का अलग आनुषंगिक संगठन भी है

तो मित्रों कोई घबराने वाली बात नहीं है देश अच्छे हाथों मे है भले ही तुरंत आपको न दिखे लेकिन समाचार चैनल और समाचार पत्र ध्यान से पढ़ते रहिए आपको पता चल जाएगा की अच्छे दिन आने की शुरुवात हो चुकी है


वंदे मातरम  

गुरुवार, 14 अगस्त 2014

क्या दोबारा आएगी महाराष्ट्र मे भाजपा की आँधी ?


लोकसभा चुनावों मे कई जगहों पर तो कॉंग्रेस का खाता ही नहीं खुला ,बीजेपी ने कई राज्यों मे पूरा मैदान मार लिया , इसके पीछे कई "बुद्धिजीवी" कहते हैं की ये सिर्फ कॉंग्रेस विरोधी लहर का प्रभाव था जिसके कारण भाजपा को इतनी बड़ी संख्या मे जनाधार मिला लेकिन ये बताना भूल जाते हैं इसके पीछे भाजपा कार्यकर्ताओं और राष्ट्रभक्तों की दिन रात की मेहनत थी ,साथ ही जनता भी कॉंग्रेस की समाज विरोधी नीतियों से त्रस्त थी और उसके बाद एक हीरो निकला जो पिछले 12 सालों से मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था जिसका नाम था नरेंद्र मोदी


पीएम मोदी ने कई वर्षों तक मीडिया के पक्षपात को सहन किया और कई मोर्चों पर "वन मैन आर्मी" बनते हुए मीडिया के और "बुद्धूजीवी" वर्ग को ठोस जवाब भी दिया कई बुजुर्ग तो ये भी कहते हैं की जनता के हृदय मे मोदी के प्रति उतना आदर है जितना लाल बहादुर शास्त्री के प्रति भी कभी हुआ करता था शायद इसी का परिणाम है की जिस तरह लाल बहादुर शास्त्री जी ने कहा की एक दिन के लिए उपवास करना शुरू कर दीजिये तो पूरे देश के लोगों ने उपवास करना शुरू कर दिया था उसी तरह जब पीएम मोदी ने अपनी चुनावी रैलियों मे कहा की बीजेपी और उसके सहयोगी पार्टियों को ही अपना वोट दें तब जनता ने भी अपना खुल कर आशीर्वाद दिया और सहयोगी दलों की भी नैया पार लग गयी

इस सब के पीछे पर्दे के पीछे काम करने वाले संघ के स्वयंसेवक और मोदी के समर्थक भी थे अब जल्द ही महाराष्ट्र मे भी चुनाव आ रहे हैं , यहाँ की जनता खुले तौर पर भाजपा के प्रतिनिधि को ही मुख्यमंत्री के रूप मे देख रही है , साफ छवि के देवेन्द्र फड़णवीस संगठन के हर क्षेत्र के कार्यकर्ता से जुड़े हुए हैं , जनता के बीच भी खास तौर पर लोकप्रिय हैं , अपने बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष के कार्यकाल के बीच उन्होने अपने कौशल का प्रदर्शन अच्छे से किया है। कई मोर्चों पर एनसीपी और कॉंग्रेस के षडयंत्रों और योजनाओं को ध्वस्त किया है जो योजनाएँ उन्होने बीजेपी और गठबंधन को नुकसान पहुंचाने के लिए बनाई थीं वो उल्टा उनके लिए ही चल पड़ी हैं ! कॉंग्रेस और एनसीपी के कई नेताओं ने प्रयत्न किए की बीजेपी को तोड़ा जाए लेकिन ये प्रदेशाध्यक्ष देवेन्द्र की कुशल रणनीति थी की एनसीपी कॉंग्रेस का ही कुनबा छोड़ा होता चला गया , कई नेताओं ने चुनाव के समय बीजेपी मे प्रवेश किया ।

पर्दे के पीछे रह कर काम करने वाले देवेन्द्र अपने ज्ञान और अपनी नेतृत्व की क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं , राज्य मे कॉंग्रेस-एनसीपी के घोटालों पर खुल कर मोर्चा खोलते हैं साथ ही साथ बीजेपी के कार्यकर्ताओं का भी उत्साहवर्धन करने मे आगे रहते हैं । विरोधियों के लिए उग्र रहने वाले देवेन्द्र फड़णवीस कार्यकर्ताओं के लिए बहुत उदार भी हैं उदाहरण के लिए ऐसे कई मौके भी आए जब संगठन के कार्यकर्ताओं की सहायता के लिए प्रदेशाध्यक्ष देवेन्द्र खड़े रहे ।

जैसे देश की जनता को 10 साल के बाद एक हीरो दिखा था उसी तरह महाराष्ट्र की जनता को भी एक नया उभरता हुआ चेहरा दिख रहा है जिसका नाम है "देवेन्द्र" शायद यही कारण है की हर तरह के सर्वे मे मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार देवेन्द्र फडणवीस ही दिख रहे हैं अभी कुछ दिनों पहले कई मराठी मीडिया चैनलों ने सर्वे किए की प्रदेश मे मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे लोकप्रिय दावेदार कौन है , हर सर्वे मे देवेन्द्र जी ने उल्लेखनीय स्थान पाया और कई सर्वे मे तो दूसरे नेताओं से सैकड़ों वोट आगे निकल गए । हर सर्वे से सिद्ध हुआ की भाजपा ही आने वाले चुनावों मे सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभर रही है और देवेन्द्र भाजपा के बैनर तले सबसे लोकप्रिय नेता के रूप मे छाए हुए हैं । 

इन सब सर्वे को ठीक से अध्ययन करने के बाद तो प्रतीत होता है की जनता ने ठान लिया है की "दिल्ली मे नरेंद्र,महाराष्ट्र मे देवेन्द्र "