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शनिवार, 16 अगस्त 2014

मोदी का 15 अगस्त 2014 का देश के नाम संदेश और कुछ बदलाव जो मैंने देखे

जैसा की मैं अपने पिछले लेख  मे ही भाजपा की स्थिति और महाराष्ट्र मे भाजपा से जुड़ी हुई घटनाओं पर अपने मत बता चुका हूँ लेकिन ऐसे कई पहलू भाजपा से जुड़े होते हैं जो मुझे लिखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं , मैं भाजपा का प्राथमिक सदस्य भी नहीं हूँ लेकिन उसकी कार्यपद्धति का मैं समर्थक हूँ खास कर के भाजपा के "कार्यकर्ता" नरेंद्र मोदी का

15 अगस्त का भाषण सही मायनों मे बहुत ही अलग था , हर वर्ष (विशेषतः पिछले 10 वर्षों मे) जब 15 अगस्त का स्वर्णिम दिवस आता था तब उससे पहले ही पीएमओ मे खटपट मच ही जाती थी
कई बड़े बड़े आईएएस अधिकारियों को भाषण लिखने के काम मे लगा दिया जाता था  ,पुरानी रद्दी मे पड़ी फाइलें खंगाली जाती थीं की पिछले वर्ष मे कितना व्यापार हुआ ,कितना उत्पादन हुआ और फिर हमारे पीएम (जिन्हें कुछ लोग यूपीए अध्यक्षा का रबर स्टैम्प भी कहते हैं ) लाल किले की प्राचीर पर आते थे और उसे बता कर चले जात थे ।

ये सब घटना जितनी आंतरिक रूप से उबाऊ और नीरस होती थी उतना ही इसका बाहरी प्रभाव भी पड़ता था

सुबह कई घरों मे तो लोग 10 बजे सोकर उठते और बाद मे पूरा दिन छुट्टी का मज़ा लेते वैसे इस छुट्टी और सोने के मज़े के बीच देश की जनता हमारे कभी न बोलने वाले भूतपूर्व पीएम साहब का "भाषण" जिसमे वो बोलते हैं वो देखने का सुअवसर गंवा देते थे

15 अगस्त 2013 को तो लोगों की नजर दिल्ली के लाल किले से ज्यादा लालन कॉलेज ,गुजरात पर थी । भारत की जनता तो उन्हें 2009 से ही अगले पीएम के रूप मे देखने लगी थी लेकिन 2013 से तो जनता ने मान ही लिया था , कई "राष्ट्रवादी" बुद्धिजीवियों का तो ये भी मानना है की 2014 के चुनाव बस औपचारिकता भर ही थे बाकी मोदी तो पहले से ही जनता के दिलों मे अपने गुजरात मॉडल ,आतंकवाद विरोधी नीति , कट्टर राष्ट्रवादी छवि के कारण छा चुके थे

तो वापस आते हैं 15 अगस्त 2014 की चर्चा पर,
15 अगस्त 2014 की सुबह लोगों के लिए अलग ही थी क्योंकि उसमे से अधिकतर जनता ने ही तो मोदी को पीएम बनाया था वैसे मोदी का भाषण उन्होने भी देखा जिन्होने मोदी को वोट दिया था और उन्होने तो जरूर देखा जो मोदी के धुर विरोधी हैं

पहली बार पीएम ने ऐसा भाषण दिया जो पूरी तरह से भिन्न था , इसमे बहुत कुछ स्वयं ही करने की प्रेरणा थी , इसमे एक स्वर्णिम भारत और स्वदेशी को प्रचार देने वाले भारत की आधारशिला रखने का प्रण था , इस भाषण मे ऐसे कई छोटे छोटे विचार थे आगे बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं



पीएम के भाषण के बीच टीवी पर कई बार सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर पीएम की कही बातों को नोट करते हुए भी दिखे जो ये बताता है की पीएम का भाषण किसी भी तरह से पूर्वनियोजित नहीं था



पीएम ने सभी विधायकों और सभी सांसदों से आवाहन किया की सभी लोग एक एक गाँव को लेकर एक आदर्श गाँव बनाएँ इसकी पूरी ब्लूप्रिंट भी वो जनता को देने वाले हैं

ऐसी चीजों का उत्पादन करने को कहा जिनका ज़ीरो इफेक्ट पर्यावरण पर पड़े और काम के मामले मे पूरा एफेक्ट करें

ये दो ऐसे मुद्दे थे जो संघ की परिपाठी को ही प्रदर्शित करते हैं , क्योकी अण्णा हज़ारे ने भी अपने गाँव के विकास के लिए संघ के नानासाहेब देशमुख का ही मार्गदर्शन लिया था तो आप समझ सकते हैं की संघ ग्राम विकास को कितनी वरीयता देता है
उसी तरह स्वदेशी निर्माण और रक्षण तथा प्रोत्साहन के लिए संघ का अलग आनुषंगिक संगठन भी है

तो मित्रों कोई घबराने वाली बात नहीं है देश अच्छे हाथों मे है भले ही तुरंत आपको न दिखे लेकिन समाचार चैनल और समाचार पत्र ध्यान से पढ़ते रहिए आपको पता चल जाएगा की अच्छे दिन आने की शुरुवात हो चुकी है


वंदे मातरम  

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